हेलो
दोस्तों, इस लेख में आपको कील-मुहाँसो को जड़ से ख़त्म करने के लिए कुछ अचूक
Best Ayurvedic Medicine for Pimples के बारे में बताऊंगा आशा करता हूँ आप
मेरे इस लेख को पढ़े और इसमें दी गई जानकारी का लाभ ले सके।
Best Ayurvedic Medicine for Pimple- 30 + अचूक आयुर्वेदिक नुस्खे
कील-मुहाँसे होते क्या है -What is Nail-Pimple?
युवावस्था में चेहरे पर कील युक्त दाने निकलते हैं इसे कील युक्त दानों
को मुहाँसो या युवापीड़िका, वयोव्रण आदि नामों से जाना जाता है। सामान्यतः
30 वर्ष बाद मुहाँसे निकलना बन्द हो जाते .हैं। यदिं कभी-कभार अपवाद स्वरूप
निकलते भी हैं तो कष्टदायक उग्रता नहीं होती है। यह युवावस्था में प्रवेश
करते ही क्यों निकलते हैं।
इसका संतोषजनक उत्तर तो नहीं मिल पा रहा है लेकिन ऐसा मन जाता है कि इसका
सम्बन्ध किसी ऐसे हार्मोन से हो सकता है किसका स्त्राव शरीर के अदंर
युवावस्था प्राप्त होने के बाद ही प्रारम्भ होता हो और बाद में शरीर के
अनुकूल हो जाने से दुष्प्रभाव युक्त लक्षण (मुहाँसें निकलना) बंद हो जाते
हों।

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| Best Ayurvedic Medicine for Pimple |
What are the causes of pimples - 6 प्रमुख कारण कील-मुहाँसो के
जैसा
कि परिचय में कहा गया है अभी तक इसके ठोस कारण का पता नहीं चला है।लेकिन जिसे सर्वसम्मति से कारण माना जाता है वह है पुरुषों के अण्डकोष केअन्दर होने वाला हॉर्मोन का स्राव जिसे एण्ड्रोजेन (Androgen) के नाम से जाना जाता है।
- इसी प्रकार स्त्रियों में डिम्बग्रंथि के अन्दर होने वाला प्रोजेस्टैरॉन (Progesterone) का स्राव।
- एक कारण यह भी माना जाता है कि इस आयु में पदार्पण करते ही वसा ग्रंथियों के विकार एवं प्रणाली विहीन ग्रंथियों (Ducttess Glands) के असंतुलन का यह एक
दुष्परिणाम है।
- पाचन विकार, कब्ज़ आदि को भी इसका कारण माना जाता
है। ये मुहाँसों के कारण हो या नहीं, लेकिन जो इनके शिकार होते हैं उनमें
मुँहासे की उग्रता अवश्य अधिक होती है। अतः ये कारण हों या नहीं उत्प्रेरक
अवश्य है।
- कुछ नये अनुसंधानों के आधार पर कार्बोहाइड्रेट और वसा (Carbohydrate and Fat) के अधिक सेवन से भी यह रोग होता है, ऐसा माना जाता है।
- कुछ वैज्ञानिक युवक-युवतियों द्वारा किए गये हस्तमैथुन को ही कारण मानते हैं।
- कुछ
इससे सहमत हैं कि युवावस्था में शरीर में बलवीर्य की वृद्धि होती है।
ब्रह्मचर्य के कारण वीर्य का संरक्षण होता है। जिसके कारण यह रोग सा रूप
लेकर उभरता है और फिर जब स्खलन प्रारंभ हो जाता है तो मुँहासों का निकलना
बन्द हो जाता है। परन्तु इसे भी संतोषजनक कारण नहीं माना जा सकता है
क्योंकि यदि यही सच है तो शादी के पूर्व जो युवक-युवतियाँ हस्तमैथुन आदि के
द्वारा रज-वीर्य का क्षरण करते हैं वे इसके शिकार क्यों होते हैं।
What are the Symptoms of pimples -6 प्रमुख लक्षण कील-मुहाँसों के
- जैसा
कि माना गया है कि युवावस्था में प्रवेश करते ही चेहरे पर छोटे-छोटे दाने
मुँहासों के रूप में निकलते है। इनके मुँह पर नोकदार काले रंग की कील
स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
- यदि स्नान के समय फर वाले तौलिये से त्वचा की सफाई करते समय यह स्वयं अलग हो जाता और यह ठीक हो जाता है।
- यदि इसे नाखून से दबाकर निकाला जाता है तो वहां काला दाग पड़ जाता है जो कि चेहरे पर भद॒दा लगता है।
- मुँहासों को कच्ची अवस्था में नाखूनों से छेड़छाड़ करने से वह घाव में बदल जाता है जो कि काफी कष्टदायक होता है।
- मुँहासों
के जो गहरे घाव होते हैं उनके निशान स्थायी होते हैं जबकि छोटे मुंहासे के
निशान अस्थायी होते हैं। धीरे-धीरे यह अपने आप मिट जाते हैं।
- सामान्यतः देखा गया है कि युवावस्था में जो कब्ज़ एवं पाचन विकारों से ग्रस्त होते हैं वे इससे अधिक पीड़ित होते हैं।
Top 10 + Tips for Cure Acne - कील-मुहँसो से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सुझाव
- पाचन विकार एवं कब्ज निवारण करें।
- घटिया क्रीम, तेल आदि का प्रयोग मत करें।
- त्वचा
की सफाई पर विशेष ध्यान दें। केवल चेहरा ही नहीं, सर्वांग शरीर की त्वचा
की सफाई नित्य स्नान के समय इस प्रकार करें कि त्वचा के रोम कूप खुल जाएं।
पसीने के रूप में शरीर की गन्दगी निकलने में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो।
- यदि साबुन लगाना हो तो डेटॉल, नीको, कार्बोलिक या टेटमोसॉल में से ही किसी एक का प्रयोग करें।
- प्रसाधनों में लोशनों का ही अधिक प्रयोग किया जाए।
- यदि रोग की उग्रता अधिक हो तो सौन्दर्य विशेषज्ञ या त्वचा रोग सलाह लें।
- मुँहासों कीलों को कभी भी नाखूनों से नहीं निकालें बल्कि स्नान करते समय मोटे तौलिये से रगड़ कर उन्हें अलग कर दें।
- भोजन में हरी साग-सब्जियाँ अधिक लें। रेशेयुक्त फल-मूलों का सेवन हितकर है। इससे कब्ज नहीं होती है।
- विटामिन “ए' एवं विटामिन 'सी” युक्त आहार अधिक लें। विशेष परिस्थितियों में इनके संश्लेषित (Synthetic) योग लिए जा सकते हैं।
- कुछ
चिकित्सक इसमें स्त्री हार्मोन एस्ट्रोजेन (Oesterogen) प्रयोग करने की
सलाह देते हैं। इससे लाभ भी होता है। लेकिन लम्बे समय तक इनका प्रयोग नहीं
किया जाए, इससे दुष्प्रभाव प्रकट होते हैं।
- स्त्रियों में मासिकधर्म सम्बन्धी गड़बड़ी हो तो उसे दूर करें।
- आजकल
युवक-युवतियाँ स्वयं भी समझने लगी हैं कि यह युवावस्था का रोग है। बाद में
स्वतः ठीक हो जायेगा। फिर भी कुछ युवतियाँ मूदु स्वभाव होने के कारण घबरा
जाती हैं। उन्हें सांत्वना दें कि देखते-देखते ठीक हो जाओगी।स्वच्छ वायु का
- सेवन दैनिक व्यायाम, अधिक चिकनाईयुक्त आहार का त्याग हितकर है।|
Top 5 Ayurvedic Patent Medicine for Acne - कील-मुहँसो को ख़त्म करने के लिए दवा
- केपाइना प्लेन Capyan (हिमालया) टिकिया - वयस्कों को 2-2 टिकियाँ नित्य 3 बार दें। इसकी फोर्ट टिकियाँ भी आती हैं जो अधिक प्रभावी होती हैं।
- खुजलीना Khujleena (मदरलैण्ड) ड्रॉप्स
- यह उत्तम रक्तशोधक है जिससे सभी प्रकार के चर्म रोगों एवं मुँहासों में
लाभ होता है। 2 से 4 मि.ली. थोड़े जल में मिलकर नित्य तीन बार 8-10 दिनों
तक दें। इसके बाद 1-2 मि.ली. नित्य तीन बार जल में मिलाकर लगातार 10 दिन तक
दें। इस प्रकार इससे चिकित्सा की अवधि कुल 15 दिन की है।
- बी-प्योर B-Pure (मुक्ति फार्मा) सिरप
- यह हर प्रकार के चर्म रोगों, खाज-खुजली, मुँहासे, फोडे-फुंसियों में
उपयोगी है। यह त्वचा सम्बन्धी विकारों को दूर करने के साथ-साथ मल-मूत्र
विसर्जन को भी नियमित करता है। 2-2 चाय चम्मच नित्य तीन बार दें।
- क्लैरिना Clarina (हिमालया) क्रीम
- डिटरजैण्ट रहित साबुन से मुँह को धोकर साफ एवं शुष्क तौलिये से पोंछकर
नित्य दो बार इस क्रीम को लगाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मलें। यह क्रीम
पूर्ण लाभ होने तक जारी रखें।
- प्यूरिम बटी एच Purim Vati (हिमालया)
- 1-2 टिकियाँ नित्य 2 बार 4 से 6 सप्ताहत क दें। आवश्यकता होने पर
चिकित्सा अवधि बढ़ायी जा सकती है। यह एक प्राकृतिक उत्तम रक्तशोधक है जिससे
अनेक प्रकार के चर्म रोगों एवं मुँहासों आदि में लाभ होता है।
Top 5 Ayurvedic Classical Medicine for Acne - कील-मुहँसो को ख़त्म करने के लिए प्राचीन दवा
- शंख भस्म
- आधा से एक ग्राम नित्य सुबह-शाम जल के साथ दें। यह मुँहासे नाशक उत्तम
योग है। पूर्ण लाभ होने तक दें। किसी प्रकार के दुष्प्रभाव की संभावना नहीं
है।
- शर्बत उन्नाव - 25 से 50 मि.ली. नित्य दो बार समभाग जल मिलाकर दें। इससे मुँहासे ठीक हो जाते हैं। इसे कुछ दिन तक नियमित दें।
- महामंजिष्टाद्यरिष्ट
- 10 से 20 मि.ली. समभाग जल मिलाकर भोजन के बाद नित्य दो बार 4-6 सप्ताह
तक दें। मुँहासे एवं अन्य सभी चर्म रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।
- सारिवाद्यारिष्ट - 15-30 मि.ली. भोजन के बाद सुबह-शाम समभाग जल मिलाकर नियमित देने से आशातीत लाभ होता है।
- गंधक रसायन
- गंधक एक ऐसा योग है जिसे चर्म रोगनगाशक औषधि के रूप में सभी चिकित्सा
पद्धतियों में वर्षो से प्रयोग किया जाता है। 1-2 गोलियाँ सारिवाद्यारिष्ट
या महामंजिष्ठाद्यारिष्ट के साथ भोजन के बाद नित्य दो बार दें। गंधक को
शुद्ध करके आयुर्वेदिक पद्धति से इस रसायन को तैयार किया गया है जो बहुत ही
प्रभावी है। इसे मुँहासों के अतिरिक्त अन्य चर्म रोगों में भी प्रयोग कर
सकते हैं।
Top 5 Ayurvedic Home Remedies for Acne - कील-मुहँसो को ख़त्म करने के लिए घरेलु उपाय
- हल्दी 2-3 ग्राम गुड़ में मिलाकर नित्य एक मात्रा लेने से चेहरे की फुँसियाँ ठीक हो जाती और चेहरे में निखार आ जाता है।
- नित्य
रात को चेहरे पर कच्चे दूध में जायफल घिसकर लेप करें। अगले दिन सुबह नींबू
के रस मिले पानी से चेहरे को धो लें। चमत्कारिक लाभ होगा।
- पपीता का दूध मुँहासों पर लगाने से मुँहासे दूर होकर चेहरा साफ हो जाता है।
- नित्य रात को मौसमी का छिलका पानी से तर करके मुँहासों पर रगड़े कुछ सप्ताह में ही चेहरा निखर आयेगा।
- मुँहासों
पर सेमल वृक्ष पर उगे काँटों को सिल पर कच्चे दूध में घिसकर नित्य रात को
लेप करें। सवेरे गुनगुने जल से धो लें। इससे मुँहासों से मुक्ति मिल जाती
है। बहुत ही प्रभावी योग है। इससे मुँहासे के दाग तक मिट जाते हैं।
अक्षर पूछे जाने वाले सवाल
क्या आयुर्वेदिक दवाइयों से कील-मुहांसो को ठीक किया जा सकता है?
जी हाँ,हम आयुर्वेदिक दवाइयों की सहायता से कील मुहांसो से छुटकारा पा सकते है।
क्या कील-मुहाँसे हानिकारक होते है?
जी हाँ, कील-मुहाँसे हानिकारक बन सकते है यदि इसका समय रहते इलाज न किया गया तो यह गंभीर रूप ले लेता है।
क्या कील-मुहाँसे एक आम समस्या है?
जी हाँ, हम कह सकते है कि कील-मुहाँसे एक आम समस्या है जबतक इसका इलाज या गंभीरता को ध्यान में रखा जाये और अच्छे से साफ-सफाई की जाये यदि हम गलत खान-पान और ज्यादा मसालेदार भोजन लेंगे जबकि हमें पता है कि हमें कील-मुहाँसो की समस्या है तो ये नुकसानदायक हो सकता है। इसके चलते स्किन या चर्म से जुड़े रोग हो सकते है।
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