सोमवार, 22 मई 2023

बवासीर की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा | Best Ayurvedic Medicine For Piles

बवासीर तुरंत ठीक करे | 100% Best Ayurvedic Medicine For Piles

हेलो दोस्तों, इस लेख में आपको बवासीर को जड़ से ख़त्म करने के लिए Best Ayurvedic Medicine For Piles के बारे में बताऊंगा। बवासीर बहुत ही दर्द से भरा भी हो सकता है और ब्लड के साथ भी हो सकता है जिसे खुनी बवासीर कहते है। आजकल बवासीर बहुत ही आम बीमारी हो गई है जो बहुत ही हानिकारक हो सकती है। किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए उसके बारे में पूरी तरह से पता होना चाहिए। इस लेख में आपको बवासीर के बारे में सब कुछ संक्षिप्त में बताएँगे। इसलिए आप इसे पूरा पढ़ने  के बाद ही बवासीर की बीमारी का इलाज करे।

    जानते है बवासीर क्या होता है | What is Piles?

    यह मलद्वार का रोग है जिसमें तीव्र पीड़ा होती है। यह दो प्रकार का होता है।

    1. बादी जिसमें मात्र मस्से होते हैं।
    2. खूनी या रक्तस्रावी जिससे बीच-बीच में रक्तस्राव होता है।

    अर्श, बवासीर, पाईल्‍ज़ (Piles)

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    जानते है बवासीर के कारणो के बारे मे | Reason of Piles?

    1. अधिक देर तक बैठकर काम करने से कब्ज्ञ हो जाती है जो बवासीर का मूल कारण है।
    2. खट्टे पदार्थों के अधिक सेवन से पाचन विकार हो जाते हैं जिससे यह रोग हो जाता है।
    3. अधिक मदिरापान करने वाले भी इसके शिकार हो जाते हैं। क्योंकि मदिरापान से यकृत विकार हो जाता है। यकृत विकार से पाचन विकार जो बवासीर का कारण होता है।
    4. मदिरापान ही नहीं किसी भी प्रकार का नशा स्वास्थ्य के लिए घातक है।
    5. वृद्धावस्था में जब पौरुष ग्रंथि (Prostate Gland) बढ़ जाती है तो इससे कष्ट हो जाता है।
    6. मूत्र सम्बन्धी रोग या मूत्र संस्थान में पथरी होने के साथ-साथ बवासीर हो जाती है।
    7. आयुर्वेद के मतानुसार शरीर में जब वातादि दोष कुपित हो जाते हैं तब बवासीर हो जाती है। वातादि दोष, त्वचा, माँस तथा मेद को दूषित करके गुदा में माँसाकुर (मस्से) हो जाते हैं। जिसे अर्श (बवासीर) कहते हैं।

    जानते है बवासीर के प्रकार के बारे मे | Types of Piles?

     बवासीर दो प्रकार की होती है

    1. बादी बवासीर

    2. खूनी बवासीर

    •  बादी बवासीर उसे कहते हैं जिसमें अंगूर जैसी मांसल संरचना मलद्वार में हो जाती है। यदि यह मस्सा (मांसलपिण्ड) या गुदा द्वार के अन्दर हो तो इसे अभ्यान्तरिक मस्सा (अभ्यान्तरिक अर्श) कहते हैं। यदि यही मस्सा मलद्वार (गुदा द्वार) के बाहर हो तो इसे बाह्य आर्श (बाह्य मस्सा) कहते हैं।
    • खूनी बवासीर (रक्तस्रावी अर्श)-इस बवासीर में रक्तस्राव शिरा से होता है। यदि इस शिरा (Vein) से रक्तस्राव होने का स्थान गुदाद्वार के बाहर की ओर हो तो बाह्य बवासीर कहते हैं। यदि यही रक्तस्रावी केन्द्र गुदाद्वार के अन्दर हो तो इसे आन्तरिक अर्श कहते हैं।

    जानते है बवासीर के लक्षणों के बारे मे | Symptoms of Piles?

    1. मस्से में काटने, फाड़ने या चुभोने जैसी असह्य पीड़ा होती है।
    2. कभी-कभी जलन और खुजली इतनी तेज होती है कि रोगी चाहकर भी ध्यान को वहाँ से हटा नहीं सकता है।
    3. यही पीड़ा और अधिक कष्टदायी तब होती है जब शौच के समय मल निकलता है।
    4. कोष्ठ काठिन्य के कारण ही तो यह रोग होता है जिससे मल की कठोरता रोगी के लिए और अधिक घातक होती है।
    5. पाखाना करते समय की यह पीड़ा पाखाना करने के कुछ देर बाद तक होती है।
    6. गुदाद्वार चारों ओर से लाल दिखाई देता है।
    7. खूनी बवासीर में रक्‍त स्राव होता है। यह रक्तस्राव मस्से या शिरा (Vein) से कहीं से भी हो सकता है।
    8. रकतस्राव अधिक होने से रोगी रक्तहीनता (Anaemia) का शिकार हो जाता है।
    9. बादी बवासीर में खुजली के कारण जाने-अनजाने में नाखून लग जाने का भय रहता है। यदि ऐसा हो तो संक्रमण हो जाता है। फिर कहने की आवश्यकता नहीं कि और क्‍या होना संभव है।
    10. यहाँ तक की गुदा मार्ग का कर्कट रोग (Cancer) के इतिहास का सम्बन्ध भी बादी मस्से जैसे रोग से ही होता है।
    11. बादी बवासीर के रोगी प्रायः संधियों की पीड़ा से भी पीड़ित हो जाता है। जाँघों में पीड़ा होती रहती है।
    12. खूनी बवासीर में रक्त मल त्याग से पहले दूँद-बूँद या मल आने के बाद आता है।
    13. कई रोगियों में रक्‍्तस्नाव सिरिंज से पिस्टन दबाकर निकाली गई औषधि की भाँति स्रावित निकलता है।

    बवासीर के बारे मे सुझाव | Tipes

    1. यदि रोग की प्रारंभिक अवस्था में चिकित्सा की जाये तो स्थायी लाभ संभव होता है। लेकिन पुराना हो जाने पर जटिल, कष्टसाध्य हो जाता है। अधिक कष्टदायी होने के साथ-साथ घातक भी हो सकता है।
    2. रोग के मूल कारण का पता लगायें । उसे ध्यान में रखकर चिकित्सा करें।
    3. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कब्ज़ मुख्य कारण है। अतः कब्ज़ निवारण पर आधारित योगों के साथ-साथ अर्श निवारक औषधियाँ दें।
    4. कब्ज निवारण के लिए नित्य सुबह-शाम खुली हवा में टहलना, नित्य सुबह-खाली पेट ताम्बे के बर्तन का शीतल जलपान करना विशेष लाभदायी है।
    5. यथासंभव पश्चिमोत्तासन, जानुशिरासन, वज्ासन, भद्रासन, मत्स्यासन, सिद्धासन, गोमुखासन, मूलबंध, खेचरी मुद्रा, महामुद्रा आदि का अभ्यास करें। यदि स्वयं इनकी जानकारी नहीं हो तो किसी प्रशिक्षक से प्रशिक्षण लेकर करें।
    6. तिल, मिश्री मक्खन के साथ नित्य सुबह खाने से कब्ज़ में लाभ होता है।
    7. भींगे या अंकुरित चनों के साथ गुड़ मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाने से भी कब्ज दूर हो जाती है।
    8. एरण्ड का तेल (Castor Oil) 5 से 10 मि.ली. दूध में मिलाकर नित्य रात को पीने से हर प्रकार की कब्ज में लाभ होता है। साथ ही बादी से उत्पन्न तमाम कष्ट भी दूर हो जाते हैं।
    9. यदि मस्सों में पीड़ा अधिक हो तो तीसी (अलसी) की पुल्टिस अथवा पिसी हुई भांड की लुगदी गर्म करके मस्सों (गुदा मार्ग) पर बाँधने से पीड़ा का शमन होता है।
    10. कब्ज़ निवारण के लिए यकृत पोषक औषधियों का सेवन करने से स्थायी लाभ होता है।

    बवासीर की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा | Best Ayurvedic Medicine For Piles

    1. लिवहेष सीरप Livhep Syrup (सत्यवती फार्मा) - 10 मि.ली. जल में मिलाकर नित्य दो बार दें। इसकी टिकियाँ भी आती है। 2-2 टिकियाँ नित्य दो बार दें।
    2. लीवो मुक्ति सीरप (मुक्ति फार्मा) - 5 मि.ली. नित्य दो बार दें।
    3. अर्शोन ड्रॉप्स (मदरलैण्ड) - 2-4 मि.ली. नित्य तीन बार लगातार 5 दिन जल में मिलाकर दें।
    4. पाइल किलर कैप्सूल (आयुर्वेद विकास संस्थान) - 2-2 कैप्सूल्स नित्य सुबह-शाम दें।
    5. पाइलेक्स Pilex (हिमालया) - 2-2 गोली नित्य सुबह-शाम दें। साथ ही लिव-52 (हिमालया) 2-2 टिकियाँ नित्य दिन और रात को भोजन के बाद दें।

    बवासीर की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा | Best Classical Ayurvedic Classical  Medicine For Piles

    1. अर्शोघ्नी वटी - यह बादी और खूनी बवासीर में उपयोगी है। 2-2 गोलियाँ नित्य दो बार दें।
    2. अभयारिष्ट - 15 से 30 मि.ली. समभाग जल मिलाकर नित्य दो बार उपरोक्त अर्शोष्नी वटी के साथ देने से चमत्कारिक लाभ होता है।
    3. अर्शकुठार रस - यह खूनी और बादी बवासीर लाभदायी है। 1 से 2 गोली नित्य 2 बार शहद के साथ या अभ्यारिष्ट के साथ दें।
    4. प्राणदा गुटिका - 1 से 2 ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर सुबह-शाम चटाकर ऊपर से दूध पिलायें। 
    5. बेलपर्पटी - 250 से 500 मि.ग्रा. नित्य सुबह-शाम शहद के साथ चाटे।

    बवासीर का घरेलु उपचार | Home Remedies For Piles

    1. गाय के दूध के मढट्ठे में सेंघधा नमक मिलाकर नित्य पीने से वातज बवासीर ठीक हो जाती है।
    2. जमीकन्द को घी में तलकर दही के साथ लेने से खूनीं और बादी आर्श में लाभ होता है।
    3. अदरक का क्वाथ 25 से 50 मि.ली. नित्य सुबह-शाम पीने से अर्श से छुटकारा मिल जाता है।
    4. थूहर (पसीज, मुठिया सीज) के दूध में हल्दी मिलाकर मस्सों पर लेप करने से बवासीर के मस्से नष्ट हो जाते हैं।
    5. बकायन (महानिम्ब) के 6 फल नित्य मिश्री के साथ एक मास तक खाने से पित्तज एवं रक्तस्नावी बवासीर ठीक हो जाती है
    क्या बवासीर जानलेवा है?

    जी हाँ,हम कह सकते है कि कई रूप में यह समस्या जानलेवा है यदि यह बार-बार और रक्त का स्त्राव ज्यादा हो और घरेलु उपचार के बाद भी बंद न हो तो यह एक घातक संकेत है तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे।

    क्या बवासीर घरेलु उपचार से ठीक किया जा सकता है?

    जी हाँ, बवासीर को घरेलु उपचार से भी ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर ये समस्या घरेलु उपचार से ठीक नहीं होती तो मै आपको सलाह दूंगा कि आप डॉक्टर से conern करे।

    क्या बवासीर जड़ से ख़तम हो सकता है?

    जी हाँ, बवासीर को जड़ से ख़त्म करने के लिए उपरोक्त घरेलु सुझाव को और अगर आपको बवासीर है तो आयुर्वेदिक दवाइयों का नियमित सेवन करे।

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