बुधवार, 24 मई 2023

Pneumonia Meaning in Hindi | 100% आयुर्वेदिक उपचार

हेलो दोस्तों, इस लेख में आपको निमोनिया के बारे में सब कुछ बताया जायेगा जिसमे निमोनिया का अर्थ (Pneumonia Meaning in Hindi), कारण, लक्षण बचाव के तरीके और घरलू व आयुर्वेदिक उपचार के बारे में संक्षिप्त में बताएँगे।

Pneumonia Meaning in Hindi | 15 घरेलु नुस्खे निमोनिया से बचने के लिए 

    Pneumonia Meaning in Hindi

    निमोनिया का अर्थ | What is Pneumonia Meaning in Hindi?

    फेफड़ों के तन्तुओं में प्रदाह (सृजन) होने से जो विकृति उत्पन्न होती है उसे न्यूमोनिया कहते हैं। यदि इस प्रकार की विकृति से एक फेफड़ा आक्रान्त होता है तो सिंगल न्यूमोनिया (Single Pneumonia) कहते हैं। जब दोनों फेफड़े आक्रान्त होते हैं तो इसे डबल न्यूमोनिया (Double Pneumonia) कहते हैं।

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    निमोनिया के 5 प्रमुख कारण | 5 Main Causes of Pneumonia

    1. इसका मूल कारण डिप्लोकॉक्कस न्यूमोनिया (Diplococcus) है जिसके संक्रमण से यह रोग होता है।
    2. शरीर कमज़ोर हो जाना, सर्दी-गर्मी का परिवर्तन या दुष्प्रभाव और एकाएक पसीना रुककर सर्दी लग जाना भी इस रोग के कारण, होते हैं।
    3. पसीने से भींगे कपड़ों को उतारकर शरीर को नंगा कर दें या फिर पसीने से तर रहने पर भी पंखें की तेज हवा में बैठ जाना आदि।
    4. कुछ ऐसे रोग भी हैं जिनके आक्रमण होने पर न्यूमोनिया हो जाता है।
    5. क़भी-कभी इन रोगों से मुक्ति पाने के बाद भी इसका आक्रमण हो जाता है। इन रोगों में मधुमेह, इन्फ्लुएन्‍जा, टायफायड, हृदय-वृक्क आदि से सम्बन्धित कुछ रोग, चेचक, प्लेग, ब्रोंकाईटेस, डिफ्थीरिया, खसरा, मेनिन्‍जाइटिस आदि मुख्य है। इनके साथ या इनके बाद न्यूमोनिया की संभावना अधिक होती है।

    निमोनिया के 11 प्रमुख लक्षण | 11 Main Symptoms of Pneumonia

    1. श्वांस कष्ट, पतली चलना आदि के साथ-साथ तेज ज्वर हो जाता है। यहाँ तक कि 105° या इससे भी अधिक तेज ज्वर हो सकता है।
    2. ज्वर सुबह कुछ कम लेकिन शाम को अधिक होता है।
    3. रोग की सौम्यता या उग्रता अनुसार ज्वर पाँचवें, आठवें, बारहवें या चौदहवें दिन उतर जाता है।
    4. ज्वर के साथ-साथ रोगी जोर-जोर से साँस लेता है।
    5. सूखी और कष्टदायी खाँसी होती है। प्रारंभ में तो बलगम नहीं निकलता है। लेकिन बाद में बलगम भी निकलने लगता है।
    6. बलगम लाल आभायुक्त (Raddish) होता है या फिर जंग के रंग का आता है।
    7. रोगी कुछ भी बोलना चाहता है तो पहले खाँसी आती है। इसलिए असहनीय कष्ट के कारण रोगी संभल-संभल कर बोलता है कि कहीं खाँसी न हो।
    8. प्रारम्भ में नाड़ी बहुत तेज और पूर्ण चलती है किन्तु धीरे-धीरे नाड़ी की गति की तीव्रता बढ़ जाती है। अन्ततः नाड़ी की गति कमज़ोर और अनियमित हो जाती है।
    9. जीभ सूखी एवं काली दिखाई देती है। रोगी कुछ भी खाना नहीं चाहता है। अरुचि हो जाती है।
    10. उपरोक्त लक्षणों के अतिरिक्त एक और लक्षण होता है जो कि रोगी करवट बदलने में भी कष्ट अनुभव करता है।
    11. यद्यपि यह रोग कष्ट साध्य नहीं होकर साध्य हो गया है। लेकिन रोग की पहचान समय पर न होने से या चिकित्सा समय पर नहीं होनें से फेफड़ों की सूजन के कारण श्वांस कष्ट एवं हृदय की गति रुक जाने से मृत्यु संभव है।

    निमोनिया से बचने के 5 प्रमुख सुझाव |  5 Tips to Cure Pneumonia Meaning in Hindi

    1. रोगी को ऐसे कमरे में रखें जो पूर्णत हवादार हो। कुछ लोग न्यूमोनिया को ठण्ड लगने का दुष्प्रभाव मानकर ठण्ड से बचाव की दृष्टि से कमरे की सारी खिड़कियों और दरवाजों को इस प्रकार बन्दं रखते हैं जिसमें हवा का आना जाना बन्द हो जाता है। यह रोगी के लिये हानिकारक होता है। इसलिये रोगी को सदा हवादार कमरे में लिटायें।
    2. रोगी को आराम करने की सलाह दें। जिस प्रकार के बिस्तर पर जिस स्थिति में लेटना चाहता है उसी स्थिति में लेटने दें।
    3. छाती पर नारियल और तारपीन का तेल समान मात्रा में मिलाकर मालिश करें।
    4. छाती के अतिरिक्त आधी पीठ तक ऊपर की ओर से एवं दोनों बगलों में भी इस मिश्रित तेल की मालिश करें। पुराने घी की मालिश भी लाभप्रद है। मालिश किसी भी तेल की करें। मालिश के बाद फलालेन का कपड़ा लपेट दें।
    5. साधारण कष्ट में रोगी को पतला, हल्का और सुपाच्य एवं पौष्टिक आहार दें। साबूदाना, बार्लेवाटर, बेदाना अनार और मसूर की दाल का पानी दें। जब बलगम ढ़ीला हो जाए तब साबूदाना और बार्ले के साथ-साथ एक कप से एक गिलास तक गर्म दूध भी दें।

    निमोनिया की आयुर्वेदिक पेटेंट दवा | 5 Ayurvedic Patent Medicine of Pneumonia

    1. ब्रॉको-17 सीरप (इण्डियन ड्रग हाउस) - 10 मि.ली. नित्य 2-3 बार दें। यह न्‍यूमोनिया की सभी अवस्थाओं में लाभदायी है।
    2. कफ क्‍योर सीरप (महावेद) - 1/2 से 2 चम्मच नित्य 3 बार दें। इसी फार्मेशी की इसी औषधि की टिकियाँ भी प्राप्य है। प्रतिमात्रा से 2 टिकियाँ नित्य 2 बार दें।
    3. कफनील (सत्यावती) - यह सभी प्रकार की खाँसी में उत्तम है। यह न्यूमोनिया की खाँसी में लाभकारी होता है।
    4. जीवन्त सीरप (सत्यावती फार्मा) - 1-2 चम्मच नित्य 2-3 बार दें। बच्चों को से चम्मच नित्य 2-3 बार दें। नज़ला, जुकाम, न्‍यूमोनिया और गले की खराश में भी उपयोगी है।
    5. कुरिल टेबलेट (चरक) - बच्चों को 1-1 टिकिया दिन में 2-3 बार एवं वयस्कों को 2-3 टिकियाँ नित्य 2-3 बार दें। न्‍यूमोनिया अति उपयोगी है।

    निमोनिया की आयुर्वेदिक शास्त्रीय दवा | 5 Ayurvedic Classical Medicine of Pneumonia

    1. गोदन्ती हरताल भस्म - 250 मि.ग्रा. और श्रृंग भस्म 125 मि.ग्रा. एक साथ पान के रस में मिलाकर सुबह-शाम देने से न्यूमोनिया में लाभ होता है।
    2. पश्चसूत रस - 65 से 125 मि.ग्रा. नित्य 2-3 बार अदरक के रस एवं तुलसी के पत्तों के रस के साथ दें। सीने की घड़घड़ाहट और श्वांस कष्ट में उपयोगी है।
    3. कल्याण सुन्दर रस - 1-2 गोली सुबह-शाम शहद एवं अदरक के रस में मिलाकर दें। यह जमे कफ को सुखाकर प्रदाह को समाप्त करके फेफड़ों को स्वस्थ बनाता है।
    4. त्रैलोक्य चिंतामणि रस - 1-1 गोली सुबह-शाम अदरक के रस और शहद में मिलाकर दें। आशातीत लाभ होगा।
    5. प्रभाकर वटी - 1-1 गोली सुबह-शाम शहद के साथ देने से फुफ्फुसजन्य सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह प्रभावी औषधि है। अतः रोग की चिकित्सार्थ यदि अन्य औषधियाँ दी जा रही हो तो भी पूरक औषधि के रूप में इसे दें।

    निमोनिया के घरेलु उपचार | 5 Home Remedies of Pneumonia

    1. विडंगभेद की छाल को चावल की माण्ड में उबालकर पिलाने से तथा छाल को पीसकर छाती पर लेप करने से न्यूमोनिया में लाभ होता है।
    2. मजीठ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम नित्य 3 बार शहद के साथ देने से फुफ्फुसावरण प्रदाह (फुफ्फुसावरण शोथ) में लाभ होता है।
    3. नमक की पोटली को छाती के आगे-पीछे और बगल से सेंक करने से फुफ्फुसावरण शोथ में लाभ होता है।
    4. यदि छोटे बच्चे न्‍यूमोनिया से आक्रान्त हों तो समुद्रफल को पीसकर छाती और पेट पर लेप करें। कर्पूर चौगुने तेल में मिलाकर पसलियों पर मालिश करने से पसलियों की पीड़ा में लाभ मिलता है।

    अक्षर पूछे जाने वाले सवाल

    निमोनिया किन लोगो को ज्यादा होता है?

    निमोनिया ज्यादातर उन लोगो को होता है चाहे वे बच्चे हो, बूढ़े हो, जवान हो, महिला पुरुष कोई भी हो यदि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है उन्हें निमोनिया रोग होने का खतरा ज्यादा होता है अधिक सर्दी के मौसम में और गर्मी में पसीने से अगर एकदम पंखे के निचे या स्नान कर लिया तो भी यह रोग होने का खतरा ज्यादा होता है।

    क्या निमोनिया जानलेवा होता है?

    जी हाँ, यदि निमोनिया होने पर उपचार नहीं किया जाये तो जानलेवा हो सकता है। लेकिन अगर ये समस्या घरेलु उपचार से ठीक नहीं होती तो मै आपको सलाह दूंगा कि आप डॉक्टर से सम्पर्क करे।

    निमोनिया होने से क्या होता है?

    इस रोग में रोगी को सर्दी-जुकाम, खाँसी, छाती में दर्द और कभी-कभी रोगी को साँस लेने में भी कठिनाई होती है।

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