मंगलवार, 23 मई 2023

Ear Pain in Hindi | इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार क्या है ?

Home Remedies for Ear Pain in Hindi | कान के दर्द से तुरंत छुटकारा पायें।  

हेलो दोस्तों, इस लेख में आपको कान का दर्द हिंदी में Ear Pain in Hindi में कारण। लक्षण और घरेलु उपचार और आयुर्वेदिक उपचारो के बारे में पढ़ेंगे। आमतौर पर कान का दर्द मोबाइल फ़ोन का ज्याद इस्तेमाल करने या फिर ईरफ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से होता है। कान का दर्द बहुत ही दर्द से भरा होता है।  इसमें रोगी की सोचने की क्षमता काम हो जाती है और रोगी का किसी भी कार्य करने में रूची नहीं होती। आइये जानते है यदि आपके या आपके बच्चे के कान में दर्द हो जाये तो कौन-कौन से घरेलु उपाय कर सकते है।

    कान का दर्द क्या है What is Ear Pain?

    कान भी ज्ञानेन्द्रियों में से एक है। इसमें पीड़ा होने से विचित्र प्रकार की बेचैनी होती है। सामान्यतः स्नायुविक पीड़ा होना ही मुख्य कारण माना जाता है। लेकिन यह आवश्यक नहीं कि हर समय स्नायुविक पीड़ा हो। कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। अतः चिकित्सा से पहले मूल कारण का पता लगाकर उसके अनुसार ही औषधि दें।


                                     कान के दर्द Ear Pain in Hindi

    You may also read: Best Ayurvedic Medicine For Piles in Hindi

    कान के दर्द के क्या कारण है | Reason of Ear Pain in Hindi

    1. कान का निरीक्षण करें | यदि मैल जमा हो तो कान की सफाई करें। यदि कान में मैल जमकर ठोस हो गया हो तो ग्लीसरीन में एसिड बोरिक मिलाकर कान में डालने से मैल नर्म होकर निकालने के योग्य हो जाता है।
    2. यदि कान साफ हो और शरीर के अन्य भागों में भी स्नायुविक पीड़ा हो तो कर्णशूल को भी स्नायुविक पीड़ा ही माने और उसी के अनुसार चिकित्सा करें।
    3. यदि सर्दी के मौसम में सर्दी लगकर कर्णशूल हो तो पीड़ा शामक औषधि के साथ-साथ फलालेन के कपड़े को 5-6 परत की तह बनाकर कान पर सिंकाई करें। कान में शुष्क रूई रखने से सर्दी का दुष्प्रभाव कम होता है।
    4. यदि बिना रूई लगाये तिल्‍ली आदि के प्रयोग से अन्दर घाव बन गया हो अथवा किसी प्रकार का घाव या फुन्सी दिखाई दे तो पीड़ा शामक योग के साथ-साथ संक्रमणरोधी योगों को भी दें।
    5. यदि किसी प्रकार की चोट लगने से पीड़ा हो रही हो तो पीड़ाशामक एवं प्रदाहनाशक योगों को दें।
    6. कभी-कभी माता, शीतला और चेचक जैसे रोगों के बाद भी यह कष्ट हो जाता है।
    7. कैन्सर और अर्बुद के कारण भी कर्ण पीड़ा होती है जो मूल चिकित्सा के अनुसार होता है।
    8. कनफेड़ों आदि के साथ भी कर्णशूल होता है जो कि कनफेड़े की चिकित्सा से ही ठीक हो जाता है।
    9. हर्पीस (Herpes) के संक्रमण के साथ-साथ भी कर्ण पीड़ा होती है। इसमें पीड़ाशामक औषधि के साथ-साथ हर्पिस की चिकित्सा विशेष रूप से करें।

    कान के दर्द के लक्षण | Symptoms of Ear Pain in Hindi

    1. कर्ण पीड़ा कभी कम और कभी तेज होती है। यह क्रम लगातार चलता है।
    2. प्रदाहयुक्त या संक्रमण के साथ-साथ यदि कर्णशूल हो तो ज्वर भी हो सकता है। 
    3. कर्णशूल के साथ-साथ सिरदर्द भी हो सकता है जो कर्णशूल के अनुपात में ही कम होने पर कम और अधिक होने पर अधिक होता है।
    4. यदि कर्णशूल स्नायुविक हो तो सिरदर्द के साथ-साथ चेहरे और जबड़े में तीव्र पीड़ा होती है।
    5. बाहरी छोटे-मोटे कीट के प्रवेश करने से भी कर्ण पीड़ा होती है जो कीट निकाल देने से रोगी स्वस्थ हो जाता है।

    कान के दर्द का प्रथम उपचार  | First Aid of Ear Pain in Hindi

    1. सर्वप्रथम रोगी को सांत्वना दें कि वह शीघ्र ही पीड़ा से हो जायेगा।
    2. कान का सूक्ष्म निरीक्षण एवं परीक्षण करें। यदि अन्दर मैल हो तो सफाई करें।
    3. यदि मैल अधिक न हो तो लहसुन से सिद्ध तेल की 2 बूँद नित्य डालने एवं कुछ देर बाद रूई लगी तीली से कान साफ करें।
    4. यदि बच्चा नादानीवश कोई दाना, पैंसिल या कोई अन्य वस्तु कान में डाल ले और पीड़ा से तड़प रहा हो तो स्वयं निकालने का प्रयास न करें। उसे यशाशीघ्र अस्पताल भेजने की व्यवस्था करें।
    5. कुछ लोग फोड़े-फुंसी आदि के कारण होने वाली पीड़ा से भी मुक्ति पाने के लिए हाइड्रोजन पेरॉक्साइड कान में डालते है। इससे हानि होती है, ऐसा मत करें।
    6. यदि दर्द का कोई स्पष्ट कारण न हो और रोगी पीड़ा के कारण बेचैन हो तो ग्लीसरीन गुनगुनी करके प्रत्येक कान में 2-2 बूँद नित्य 2-3 बार डालें।
    7. यदि कान से किसी प्रकार का स्राव आ रहा हो तो किसी के कहने पर भी हाइड्रोजन पैरॉक्साइड नहीं डालें। चाहे कहने वाला कितना ही बड़ा ज्ञाता क्‍यों न हो?
    8. कार्बोलिक एसिड आधा भाग को ग्लीसरीन 15 भाग में मिला लें। बैण्डेज का कपड़ा इसमें तर करके कान में घुमायें, पीड़ा का शमन होगा।

    आयुर्वेदिक पेटेंट दवाइयाँ  | Ayurvedic Patent Medicine For Ear Pain

    1. होम ऑयल (आयुर्वेद विकास संस्थान) - 2-2 बूँद कान में आवश्यकतानुसार 3-4 घंटे के अंतर पर कान में डालें। यह फोड़े-फुंसियों एवं पीड़ा को दूर करने में सफल है।
    2. हरारत टेबलेट (मुक्ति फार्मा) - यह ज्वर एवं शारीरिक दर्दों को दूर करने के साथ-साथ कर्ण पीड़ा में भी उत्तम है। 1-2 टिकियाँ नित्य तीन बार दें।
    3. रिगेन शल्लाकी टेबलेट (मुक्ति फार्मा) - यह पाचक होने के साथ वात-विकार नाशक है। अतः वातजनित कर्णशूल में भी उपयोगी है। 1-2 टिकियाँ नित्य 2-3 बार दें।
    4. ज्वाइन्टैक्स कैप्सूल (आयुर्वेद विकास संस्थान) - 1-2 कैप्सूल्स नित्य दो बार गर्म दूध के साथ दें। इससे संधि शूल दूर होने के साथ-साथ अन्य सभी प्रकार की पीड़ाएं भी दूर हो जाती है। कर्णशूल में भी.लाभ होता है।
    5. सप्तगुण तेल (बैद्यनाथ) - 1-2 बूँद नित्य 2-3 बार कान में डालें। आशातीत लाभ होगा।

    आयुर्वेदिक शास्त्रीय दवाइयाँ  | Ayurvedic Classical Medicine For Ear Pain

    1. कुम्भी तेल - हल्का शुष्म करके 2 बूँद नित्य 3-4 बार. कान में डालने से कर्ण पीड़ा दूर हो जाती है।
    2. दशमूल तेल - 2-3 बूँद नित्य 3-4 बार कान में डालें। यह कान की सभी प्रकार की पीड़ा में लाभदायी है।
    3. पंचगुण तेल - 2-3 दूँद नित्य 3-4 बार कान में डालें।
    4. बिल्व तेल - 2-3 बूँद कान में नित्य 4 बार डालने से कर्णशूल एवं बहरापन में लाभ होता है। 
    5. सप्तगुण तेल - 2-3 दूँद नित्य 3-4 बार कान में डालने से नया-पुराना कर्णशूल ठीक हो जाता है।

    कान के दर्द के घरेलु नुस्खे | Home Remedies For Ear Pain

    1. आक (मदार) का पीला पत्ता बिना छिद्र वाला घी से चुपड़ लें। इसे गर्म करके निचोड़कर इसका रस निकाले। इस रस की दो बूँदें 3-4 घंटे बाद कान में झलें। इससे आशातीत लाभ होगा।
    2. गर्म दूध में घी मिलाकर नित्य 2-3 बार पीने से कर्णशूल में लाभ होता है।
    3. मूली का रस, कड़वा तेल और शहद समान मात्रा में मिलाकर गुनगुना करके 2-3 बूँद नित्य 3-4 बार कान में डालने से कर्णशूल में लाभ होता है।
    4. गोमूत्र को गर्म उतारकर थोड़ा ठण्डा करके 2-3 बूँदें नित्य 3-4 बार डालने से लाभ होता है।
    5. खसखस का तेल 2-3 बूँदे नित्य 3-4 बार कान में डालने से कर्ण पीड़ा में लाभ होता है।

     FAQ

    क्या कान का दर्द जानलेवा है?

    जी नहीं,हम कह सकते है कि कई रूप में यह समस्या जानलेवा नहीं है यदि यह बार-बार और रक्त का स्त्राव ज्यादा हो और घरेलु उपचार के बाद भी बंद न हो तो यह एक घातक संकेत है तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे।

    क्या कान का दर्द घरेलु उपचार से ठीक किया जा सकता है?

    जी हाँ, कान का दर्द को घरेलु उपचार से भी ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर ये समस्या घरेलु उपचार से ठीक नहीं होती तो मै आपको सलाह दूंगा कि आप डॉक्टर से सम्पर्क करे।

    क्या कान का दर्द जड़ से ख़तम हो सकता है?

    जी हाँ, कान के दर्द को जड़ से ख़त्म करने के लिए उपरोक्त घरेलु सुझाव को अपनाय और तो आयुर्वेदिक दवाइयों का नियमित सेवन करे।

    ...

    कोई टिप्पणी नहीं:

    एक टिप्पणी भेजें

    Pneumonia Meaning in Hindi | 100% आयुर्वेदिक उपचार

    हेलो दोस्तों, इस लेख में आपको निमोनिया के बारे में सब कुछ बताया जायेगा जिसमे निमोनिया का अर्थ ( Pneumonia Meaning in Hindi ), कारण, लक्षण बच...